December 12, 2018

MARRIAGE SOLUTION BY ASTROLOGY

विवाह में विलम्ब / देरी के कारण : वर एवं कन्या के विवाह में देरी के अनेकों कारण हो सकते हैं | विवाह में यदि देरी हो रही है, बार-बार विघ्न आ रहे हों, तो सबसे पहले तो अपनी जन्मपत्रिका का विश्लेषण किसी योग्य विद्वान पंडित जी से करवाना अनिवार्य है | वर एवं कन्या की जन्मकुंडली में यदि कोई ऐसा योग है जिसके कारण विवाह में देरी हो रही हो, कोई दोष उपस्थित होने के कारण भी विवाह में विघ्न आ रहे हों | जन्मपत्रिका में विवाह के भाव (सप्तम भाव), सप्तमेश, शुक्र एवं गुरु की उपस्थिति का पूर्ण अवलोकन करना चाहिए | सप्तम भाव, सप्तमेश पर अशुभ ग्रहों का प्रभाव होने से भी विवाह में विलम्ब होता है | कुंडली में जितने ज्यादा दोष होते हैं उतना ही विवाह में देरी होती हैं, विवाह में विघ्न आते हैं |

विवाह में विलम्ब के लिए वर एवं वधू की जन्म कुंडली के अवलोकन के साथ-साथ अपने घर के वास्तु का भी विशेष ध्यान देना चाहिए | यदि घर में किसी भी प्रकार का वास्तु दोष होता है तब भी विवाह में देरी होती है, विवाह में बार-बार समस्या उत्पन्न होती है | अपने घर में पूजा का स्थान, रसोई, पानी की व्यवस्था, प्रवेश द्वार, सीढियों की बनावट, घर का रंग आदि का भी पूरा-पूरा प्रभाव पड़ता है | वर एवं कन्या की कुंडली में जो दोष उपस्थित होंगे, ठीक वैसे ही दोष घर में भी होंगे, घर के किसी सदस्य में होंगे, दोष का अर्थ है कोई भी स्थान, व्यक्ति अथवा वस्तु के द्वारा उत्पन्न दोष के कारण ही विवाह में देरी होती है या विघ्न आता है | अतः उपरोक्त सभी करणों का भली प्रकार से अवलोकन अवश्य करवा लेना अनिवार्य हैं और उपस्थित सभी प्रकार के दोषों की शांति करवाने से शीघ्र विवाह के योग बनते हैं और विवाह संपन्न होता हैं |

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *