December 12, 2018

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प्रेम विवाह होगा या नहीं, प्रेमी अथवा प्रेमिका का स्वभाव कैसा होगा, व्यक्ति जिससे प्रेम करता है क्या उसी से प्रेम विवाह होगा या नहीं, विवाह होने के पश्चात प्रेमी और प्रेमिका के संबंध कैसे रहेंगें, प्रेम विवाह में सफलता किस प्रकार से मिलती है, कुंडली में कौनसे ग्रह विवाह के योग बनाते हैं, प्रेम विवाह में किसी भी प्रकार की बाधा हो, तो उसे दूर करने के उपाय प्रेम विवाह, प्रणय संबंधों के लिए भवन के पूर्वी एवं उत्तर-पश्चिम भाग और अपने जन्मपत्रिका (कुंडली) के प्रथम और पंचम भाव प्रेम विवाह का योग बनाता है | घर में पूर्वी दिशा और पश्चिम-उत्तर दिशा में रखी वस्तुओं का किसी प्रकार से आपसी संबंघ होगा, व्यक्ति की कुंडली में भी वही योग घटित होंगे | सबसे पहले तो विवाह के कारक ग्रह शुक्र की स्थिति का अवलोकन करना चाहिए और उसके पश्चात गुरु के शुभ प्रभाव का भी पूर्ण परीक्षण करना चाहिए | इसके पश्चात राहु किस भाव में स्थित है देखना अनिवार्य है |

शुक्र यदि व्यक्ति की जन्मपत्रिका में प्रथम भाव में ही स्थित हो और इसका किसी भी प्रकार से पंचम भाव के स्वामी से संबंध बनता है तो प्रणय संबंध बनते हैं और इसके साथ ही जब लग्न के स्वामी और पंचम भाव के स्वामी का सप्तम भाव और भावेश के साथ किसी भी प्रकार से शुभ संयोग बनता है तो प्रेम विवाह के योग घटित होते हैं | कुंडली में यदि किसी भी अशुभ ग्रह का संबंघ पंचम भाव के स्वामी, लग्न के स्वामी के साथ बनता है तो प्रेम विवाह में बाधा उत्पन्न होती है | यदि लग्न व लग्न के स्वामी ग्रह पर किसी भी अशुभ ग्रह राहु, केतु, मंगल, सूर्य का प्रभाव होगा तो जिससे व्यक्ति प्रेम करता है उसका स्वभाव कुछ क्रोधी अवश्य होगा | इसी तरह से यदि कुंडली के पंचम भाव और पंचमेश पर यदि अशुभ ग्रहों का प्रभाव अधिक है तो प्रणय संबंध बाधित होतें हैं |

यदि जातक की कुंडली में लग्न के स्वामी पर अथवा पंचम भाव के स्वामी पर गुरू की शुभ दृष्टि होगी तो व्यक्ति कितना भी प्रयास कर ले प्रेम विवाह नहीं होगा | कुंडली में पंचमेश और शनि के किसी भी प्रकार से यदि संबंध होते हैं तो प्रेमी की आयु अपने से अधिक (स्त्री-पुरुष) से होते हैं | प्रेम विवाह करने हेतु लग्न और लग्नेश, पंचम भाव और उसके स्वामी ग्रह तथा सप्तम भाव के स्वामी का उपाय करने से प्रेम विवाह होता है | प्रेम विवाह में यदि लग्न से सम्बंधित बाधा आ रही हो तो स्वयं के ग्रह और उस पर पड़ने वाले अशुभ ग्रहों और उनके प्रभाव की शांति करवानी चाहिए | यदि प्रेमी/प्रेमिका से सम्बंधित किसी भी प्रकार की रुकावट आ रही हो तो पंचम भाव के स्वामी और पंचमेश तथा उस भाव पर पड़ने वाले अशुभ ग्रहों के प्रभाव की शांति करवाने से आ रही बाधा समाप्त हो जाती है | प्रेम विवाह के लिए सप्तम भाव, सप्तमेश और गुरु का उपाय पूर्ण लाभ देता है और विवाह पूर्ण सफल होता है |

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